Wednesday, 20 December 2017

विपत्तियाँ ललकारती तू उनका अब संहार कर







ये पथ जो तूने चुन लिया, ना उससे अब इनकार कर |

विपत्तियाँ ललकारती, तू उनका अब संहार कर ||

भले अँधेरा ढंक रहा, तू खुद रवि सा जगमगा|
भले अकेला चल रहा, तू खुद को शूरवीर बना ||

बहुत पराश्रित बन लिया, तू स्वयं को अब आधार कर |
चुनौतियों से नजर मिला, और युद्ध का आगाज़ कर ||

तू हार से ना डगमगा, हौसले से सर उठा |
अनिश्चितता को भूल जा, तू कर्म को प्रधान बना ||

ना फल है तुझको मिल रहा, तो खुद को फिर से बीज कर|
जो भय है तुझको छल रहा, अब उसको दर किनार कर ||

जिद जोश जुनून जगा, तू खुद को अब पहचान जरा |
स्वयं मार्ग प्रशस्त  कर , तू खुद को यूँ मिशाल बना ||

विपत्ति का तू सर झुका, आराम को विराम कर |
सतत कदम बढाये जा, तू जीत का अब शंखनाद कर ||

~अपूर्वा गुप्ता


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